पिता की जिंदगी
चलिए मैं आपको एक कहानी सुनाता हूं->
यह कहानी की शुरुआत होती है एक गांव से जहां एक पिता अपने मालिक के बगीचे में काम करता है लगभग उसे 5 से 6 साल हो गए थे, उसे काम करते-करते उसके मालिक उससे बहुत खुश रहते थे। फिर उसे एक लड़का हुआ, जब वह 10 साल का हुआ तो वह भी अपने पिता के साथ उसी बगीचे में काम करने लगा वह अपने पिता की सारी बातें मानता था। फिर एक दिन पिता ने अपने बेटे को एक टास्क दिए वह हर दिन अपने बेटे को टास्क देता था। तो उसने अपने बेटे को यह टास्क दिया कि वहा जो बड़ा सा पत्थर है उसे लेकर आओ बेटा गया लेकिन पत्थर उठाना उसके बास का नहीं था तो फिर को वापस आकर अपने पिता से बोला कि पत्थर बहुत भारी है। पिता ने कहा कि अच्छा ठीक है तुम्हारा काम आसान हो जाए इसलिए जो भी तुम चाहो को ट्रिक इस्तमाल कर सकते हो वह फिर गया उसने कोशिश की सभी ट्रिक के साथ फिर भी वह पत्थर को रती भर भी नहीं हिला पाया जिससे वह रोने लगा फिर उसके पिता उसके पास आए और पूछा कि तू क्यों रो रहा है, बेटे ने कहा ये पत्थर हिल भी नहीं रहा है पिता ने कहा तूने सभी ट्रिक अपना के देख लिया लेकिन एक चीज तू भूल गया बेटे ने कहा क्या पिता बोले कि तू मुझे बुलाना भूल गया, अगर तू मुझे बुलाता तो मै जरूर आता।
सच में पिता कि जगह कोई नहीं ले सकता

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