जिन्दगी

एक बार स्कूल के बाहर बारिश हो रही थी, टीचर क्लास में बच्चो को पढा रहे थे तभी टीचर ने बच्चो से पुछा की अगर मैंने तुम लोगो को 100-100 दिए तो, तुम लोग उसका क्या करोगे कोई बोला मैं विडियो गेम लूंगा, कोई बोला मैं कपडे खरीदुंगा, कोई बोली मैं गुडिया लुंगी, कोई बोला मैं बैट लूंगा पर एक लड़का था। वह सोच में पडा हुआ था, टीचर ने देखा तो उससे पुछा की तुम इतना क्या सोच रहे हो, 'तो लडका बोला मैं  सोच रहा हूँ कि मै अपनी माँ को एक चश्मा दे दूँ। 
टीचर:- ये तो तुम्हारे पिता भी दे सकते है।
लङका:- लेकिन इस दुनिया में मेरे पिता नही है, टीचर भावुक।
फिर टीचर बोले कि तुम्हारी माँ को चश्मा क्यो चाहिए; लङका बोला कि मेरी माँ मुझे कपड़े सीलकर मुझे पढाती हैं और अब उन्हें थोड़ा कम दिखाई देने लगा है, तो इसलिए। और उनका सपना है कि मैं बडा आदमी बनूँ।
टीचर ने अपने वादे के मुताबिक बच्चे को 100 रूपये दिए और कहा कि 100 रूपये और उधार रखो और जब बड़े आदमी बन जाना तो ये उधार लौटा देना।
                         20 वर्ष बाद 
उसी स्कूल के बाहर बारिश हो रही थी, वही टीचर बच्चों को पड़ा रहे थे। तभी स्कूल के बाहर जिला कलेेेक्टर की गाड़ी आयी तभी पुुरे स्कूल मेें सन्नाटा पसर गया कलेेेक्टर गाड़ी से उतरे और उसी टीचर के पास गए पैैर छुुआ और कहा आपके ये 100 रूपये जो आपने मुझे उधार दिया था। टीचर समझ गए कि ये वही लडका है।
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   कुछ इस तरह फ़कीर ने ज़िन्दगी की मिसाल दी,
       मुट्ठी में धूल ली और हवा में उछाल दी !