सुनो सबकी लेकिन,करो अपने मन की
मै आपको एक किस्सा सुनाता हूं, एक बार पिता और बेटा एक खच्चर को लेकर अपने घर के तरफ जा रहे थे। लेकिन घर बहुत दूर था, पिता ने सोचा कि बेटा थक गया होगा तो उसे खच्चर पर बैठने को बोल दिया और वो बैठ गया। रास्ते में कुछ लोग कहने लगे कि अरे, कैसा बेटा है पिता चल रहा है और खुद बैठ है, तो वह उतर गया। कुछ देर बाद बेटे ने पिता को बोल दिया बैठने को और वो बैठ गए, रास्ते में फिर कुछ लोग बोलने लगे कि अरे; कैसा बाप है खुद बैठ है और बेटा चल रहा है, तो वह उतर गया। कुछ देर बाद फिर रास्ते में कुछ लोग बोलने लगे अरे; कैसे लोग है खच्चर के होते हुए भी दोनों पैदल चल रहे है, तो फिर दोनों खच्चर पर बैठ गए, कुछ देर बाद फिर कुछ लोग कहने लगे अरे; कैसे लोग है, बेचारे खच्चर की जान लेंगे क्या, तो फिर दोनों उतर गए बाद में दोनों समझ गए थे कि____
समाज तो केवल अपनी राय देती है
लेकिन अपने मन की करनी चाहिए
इससे तो वे दोनों समझ गए थे कि
''सुनो सबकी लेकिन करो अपने मन की''

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