परिस्थितियों से समझौता
एकबार टीचर बच्चो को कुछ पढा रहे थे। तभी उन्होंने एक कटोरा लिया और उसमे एक मेढक को डाल दिया मेढक बडे आराम से उसमे खेल रहा था, तब टीचर ने उस कटोरे को चूल्हे पर रख दिया तब मेढक अपने आप को adjust कर लेता था।जब चूल्हे का तापमान धीरे-धीरे बढने लगा तब भी मेढक अपने आप को adjust कर रहा था। फिर एक समय ऐसा आया जब पानी एकदम खौलने लगा तब मेढक ने सोचा अब कटोरे से छलांग मारनी पडेगी लेकिन वो इतना सक्षम नही था, कि वो छलांग मार सके। कुछ देर बाद वो मेढक उसी में तडप-तडप कर मर गया।
फिर टीचर ने बच्चो से पुछा की मेढक कैसे मरा? बच्चो ने कहा पानी के खौलने से इसलिए मर गया।
टीचर ने कहा कि नही वो अपने गलती से मरा है।
बच्चे:- वो कैसे?
टीचर ने कहा जब मेढक को पता था कि पानी का तापमान धीरे-धीरे बढ रहा है, लेकिन समय रहते उसने छलांग नही मारी, और जब पानी खौलने लगा तब वह सक्षम नही था, इसलिए वो अपने गलती से मर गया।
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जब हम जानते है कि हमारे जीवन में कोई दिक्कत होने वाली है, तब हम दिक्कतो का हल नही निकालते। जब हमारी परिस्थिति बिगड़ जाती है तब हम अपने परिस्थितियो से समझौता करते है।
फिर टीचर ने बच्चो से पुछा की मेढक कैसे मरा? बच्चो ने कहा पानी के खौलने से इसलिए मर गया।
टीचर ने कहा कि नही वो अपने गलती से मरा है।
बच्चे:- वो कैसे?
टीचर ने कहा जब मेढक को पता था कि पानी का तापमान धीरे-धीरे बढ रहा है, लेकिन समय रहते उसने छलांग नही मारी, और जब पानी खौलने लगा तब वह सक्षम नही था, इसलिए वो अपने गलती से मर गया।
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जब हम जानते है कि हमारे जीवन में कोई दिक्कत होने वाली है, तब हम दिक्कतो का हल नही निकालते। जब हमारी परिस्थिति बिगड़ जाती है तब हम अपने परिस्थितियो से समझौता करते है।

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