99 का खेल
धीर सिंह एक राज्य का राजा था। उसके पास धन-दौलत और ऐस और आराम की जिन्दगी थी।मानो उसके पास कोई भी चीज की कमी नही थी, फिर भी वह सन्तुष्ट नही रहता था। एक दिन राजा बगीचे में टहल रहे थे, तभी उनकी नजर एक नौकर पर पडी। वह खुशी से अपना सभी काम कर रहा था। तभी राजा सोच मे पड गये कि मेरे सब कुछ है, लेकिन उसके पास तो कुछ भी नही। यह बात राजा के मन मे खटकने लगा तभी राजा ने आदेश दिया कि इस नौकर को हमारे राजसभा मे बुलाया जाये। नौकर डरते-डरते राजा के सामने आया तब राजा ने पूछा कि तुम्हारे पास ज्यादा कुछ नही लेकिन तुम सन्तुष्ट हो और मेरे पास सब कुछ है लेकिन मै सन्तुष्ट नही हूँ। ऐसा क्यों?
तब नौकर बोला कि आप कि दया से खाने को खाना और रहने को छत मिल जाता है। इससे ज्यादा मुझे कुछ चाहिए ही नही। 'तब राजा ने यह सारी बात अपने सलाहकार को बतायी' तब सलाहकार समझ गया ''ओ'' यह सब 99 का खेल है। यह सुनकर राजा को कुछ समझ न आया तब सलाहकार ने कहा कि जैसा मै कहता हूँ, वैसा करना! उन्होंने कहा कि एक पोटली मे 99 सोने के सिक्के डाल कर उस नौकर के घर के बाहर रख देना। राजा ने रात मे ही रखवा दिया अगले दिन सुबह जब नौकर बाहर आया और बाहर रखे पोटली पर नजर पड़ तभी उसने पोटली खोली और देखा उसमे सोने के सिक्के थे तब उसने सिक्के गिने तब 99 आये उसे लगा, उसे लगा कि 100 सिक्के होने चाहिए फिर उसे लगा कि शायद मैने गलत गिन दिए है। उसने फिर से गिने लेकिन 99 ही आ रहे थे। तब उसने हर खोजा कि कही 1 सिक्का गिर तो नही गया। लेकिन उसने हार नही मानी वह खोजता रहा-खोजता रहा लेकिन उसे नही मिला। यहा तक की वह 100 सिक्के पुरे करने के लिए अपनी नींद, खान-पान तक छोड दिया। वह पैसो के लालच मे सब कुछ दांव पर लगा दिया। ---->
काम का आलस और पैसो का लालच
कभी आदमी को महान बनने नही देता।
मतलब मनुष्य को जितना भी मिलने लगता है, उसे हमेशा कम ही लगता है।

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